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3.9 KiB

दुःख, क्लेश, परेशान होना, सताना, कठिनाइयां, आपदा

परिभाषा:

“दुःख” जीवन का अनुभव है अर्थात कठिन और निराशा का।किसी को “क्लेश” पहुचाना अर्थात् उस मनुष्य को “परेशान” करना या “कष्ट” देना।“परेशान होना” का अर्थ है किसी बात से घबराना एवं हताश होना।

  • कष्ट, शरीरिक, मानसिक या आत्मिक हो सकता है जिससे मनुष्य आहत होता है।
  • बाइबल में, कष्ट परिक्षा के समय होते हैं जिनके द्वारा परमेश्वर विश्वासियों को विश्वास में परिपक्व एवं विकसित होने में सहायता करता है।
  • पुराने नियम में “कष्ट” अनैतिक जीवनशैली और परमेश्वर का त्याग करनेवाली जातियों के दण्ड के सन्दर्भ में आया है।

अनुवाद के सुझाव

  • “कष्ट” या “क्लेश” का अनुवाद “संकट” या “दुःखदायी घटनाएं”या “उत्पीड़न” या “दुखद अनुभव” या “विपत्ति” भी किया जा सकता है।
  • “घबराना” का एसे शब्द या उक्ति से अनुवाद किया जा सकता है, जिसका अर्थ हो “कष्टों में होना” या “भयानक कष्ट का अनुभव करना” या “गहरी चिन्ता” या “तनाव” या “विपत्ति” या “भय” या “परेशानी”।
  • “उसे परेशान मत करो” का अनुवाद हो सकता है, “उसे रहने दो” या “उसकी आलोचना मत करो”
  • “विपत्ति के दिन” या “विपत्ति के समय” का अनुवाद हो सकता है, “जब तुम कष्टों का अनुभव करो” या “जब तुम्हारे सामने कठिनाइयां आएं” या “जब परमेश्वर विपत्तियां लाए”।
  • “कष्ट लाना” या “कष्ट का कारण” का अनुवाद हो सकता है, “कष्टकारी बातें करना” या “कठिनाई उत्पन्न करना” या “कठिनाइयों का अनुभव कराना”

(यह भी देखें: क्लेश देना, सताना)

बाइबल सन्दर्भ:

शब्द तथ्य:

  • Strong's: H205, H926, H927, H1204, H1607, H1644, H1804, H2000, H4103, H5916, H5999, H6031, H6040, H6470, H6696, H6862, H6869, H6887, H7264, H7267, H7451, H7489, H8513, G387, G1613, G1776, G2346, G2347, G2350, G2360, G2873, G3636, G3926, G3930, G3986, G4423, G4660, G5015, G5182